12:27 PM Posted by संगीता मनराल

तारीख २२ अगस्त, दिन सोमवार, शाम के ०४:३० का समय में भी अन्ना के आन्दोलन की भागीदार बनना चाहती थी, सो इस आन्दोलन को प्रत्यक्ष रूप से महसूस करने पहुँच गयी रामलीला मैदान लोगो से खचा-खच भरा मैदान देख कर मन गदगद हो गया... लगभग सारे भारतवर्ष के लोग इस आन्दोलन का हिस्सा बनना चाहते थे दिल में जोश लिए और आँखों में तमन्ना की जनलोकपाल बिल आ गया तो वाकई भारत की कुछ और तस्वीर होगी... घर से सोचकर आई थी की शायद १ घंटा ही रुक पाऊँगी लेकिन मन ही नहीं हुआ की वहां से निकला भी जाए

कुछ लोगो से बात हुई तो मालूम हुआ की लोग जाने कहाँ कहाँ से आये हैं. अपना घर, बच्चे और नौकरी (छुटी नहीं मिली) छोड़कर उन्ही लोगो में से एक महेश पाल भी थे, अहमदाबाद से आये हैं... जब रामदेव बाबा का अनशन था तब भी आये थे... बताते हैं की वो प्रत्यक्ष साक्षी हैं पुलिस के डंडो के... उनका मानना भी यही है की जो उस रात हुआ वो गलत था. महेश उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं लेकिन रहते अहमदाबाद में हैं. जींस की पैंट सिलने की दुकान चलाते है शादी नहीं की है और आगे करने का भी इरादा नहीं है, वैसे परिवार है, माँ पापा बड़े भाई भाभी और उनके बच्चे.

मैंने पूछा आप यहाँ क्यों आये हैं, तो बोले पिछले कई दिनों से टीवी पर देख रहा था... लेकिन वहां रुका ना गया तो चला आया. महेश बताते हैं की वे रोज पूजा करते समय भगवान से यही दुआ करते थे की कुछ तो करो इस भ्रष्टाचार का... और आज उनकी दुआ कबूल हुई मालूम पड़ती है... अब जब तक जनलोकपाल नहीं आ जाता और अन्ना जी अनशन नहीं छोड़ते वो यहाँ से कहीं नहीं जाने वाले...

सच रामलीला मैदान में जो देखने को मिला वो सब, उम्मीदों से कहीं ऊपर था सभी उम्र, प्रान्त, जात, धर्म के लोग मौजूद थे वहां. अन्ना जी बार बार यही दोहराते हैं की उनको इन लोगो को देखकर ऊर्जा मिलती है... ये सच है... वही ऊर्जा का प्रवेश मैंने अपने भीतर भी महसूस किया..

यहाँ ब्लॉग में ये सब लिखना इसलिए जरुरी हो जाता है की में इस आन्दोलन को हमेशा अपनी यादों में संजोकर रखना चाहती हूँ. बताना चाहती हूँ की में भी इसका हिस्सा रही हूँ... क्या आप थे वहां??