उमस भरा एक दिन

3:22 PM Posted by संगीता मनराल

दिन का १ बजा है, मेरा स्कूटर रेड लाइट पर रुका, पास ही एक ऑटो भी रुका इतनी गर्मी, वैसे गर्मी कहना गलत होगा इतनी उमस... हाँ अक्सर कहते सुना है जुलाई - अगस्त के महीने ऐसे ही होते हैं. सूरज बादलों के पीछे है.. लग रहा है बादलों को किसी का इंतज़ार है.. हाँ शायद हो भी सकता है... पड़ोस का रिंकू, मोनू, मिंकू और अरुण की मम्मी स्कूल से घर पहुच जाए... तब बरसेंगे... नहीं तो न जाने कितने ही ताने न दे डालें...

आज लगता है रेड लाइट कुछ ज्यादा लम्बी हो गयी है... अरे हाँ यहाँ की रेड लाइट तो अक्सर ख़राब ही रहती है. बेचारा ट्राफिक इंस्पेक्टर रोज इतनी चक्कलस करता है.... बावजूद इसके लोग जहाँ मन हुआ वहां निकाल ले जाते हैं और देखते ही देखते कितनी ही गाड़ियाँ आ गयी..

हम शांत भाव से जेब्रा क्रोस्सिंग के पीछे ही खड़े हैं, मै, ऑटो वाला और इतनी उमस... ऑटो के अन्दर मुस्लिम परिवार है... मैं इतनी आश्वस्त इसलिए थी की अन्दर बैठी महिला ने बुरका पहना हुआ है,सोचा क्या उसे गर्मी नहीं लग रही होगी.. खैर शायद धर्म इतनी रियायत ना देता हो. महिला की गोद में करीब ५-६ वर्ष का बच्चा है जो गोल सफ़ेद, जालीदार (क्रोशिये से बुनी) टोपी लगाये बार बार अपने चहरे से पसीना पोछ रहा है... उसके माथे और गर्दन के आसपास घमौरियां हैं.. कुछ लाल हैं और कुछ पानी निकल जाने से पिचक कर उसके शरीर पर सफ़ेद छिलकेदार पाउडर सी लग रही हैं...

हम अब भी रेड लाइट पर ही हैं... पता नहीं अभी कितनी देर और लगे... और ये बारिश अब भी अड़ियल बच्चो की तरह टस से मस नहीं हो रही... मैं बोलती हूँ अब तो रिंकू, मोनू, मिंकू और अरुण की मम्मी भी घर पहुँच गये होंगे कोई कुछ नहीं कहेगा.. अब तो बरसो.. ये उमस शायद कुछ कम हो जाए...

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1 comments:

  1. sunita said...

    It was so desciptive and lively that I could feel heat at red light. really written very well