तुम्हारा प्यार

11:46 AM Posted by संगीता मनराल

कितनी मुरादों से तुम्हें पाया है
शायद तुम्हें यकीन ना हो


पर फिर भी


मैं अपनी पलक से गिरने वाले
उस छोटे बाल के टुकडे को
हथेली पर सजाकर
आंख मूंदकर तुम्हें मांगती
और फिर उसे तेज़ फूंक से उड़ा देती



कई टूटते सितारों को मैंने
तुम्हारा प्यार पाने के लिए
ज़मीन पर गिरने दिया


और वो संतरी, छोटा
पंख वाला कीड़ा
जिसे हाथ पर रखकर
पास-फेल पास-फेल


किया करती थी
आज तक मुझे
मेरे श्रम की
याद दिलाता है

++++++++++++

0 comments: